पूर्वी दिल्ली : मयूर विहार के मदर मैरी स्कूल में स्वच्छता अभियान, छात्राओं ने दिया समाज को स्वच्छता का संदेश
लेखक: कमल प्रजापति, पत्रकार (पूर्वी दिल्ली) पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 स्थित मदर मैरी स्कूल में रविवार को एक विशेष स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में न केवल स्कूल प्रशासन और छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि क्षेत्रीय निगम पार्षद श्री संजीव सिंह भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। स्कूल के सेक्रेटरी पीयूष चौधरी, शिक्षकों, एमसीडी कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
अभियान का उद्देश्य
इस अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य था छात्रों और स्थानीय लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना। अक्सर देखा गया है कि जागरूकता की कमी के कारण लोग गंदगी फैलाते हैं या प्लास्टिक का बेतहाशा इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम बच्चों के जरिए बड़े-बुजुर्गों तक भी एक संदेश लेकर पहुंचा कि—“स्वच्छ रहना ही स्वस्थ रहने की पहली शर्त है।”
छात्राओं की रचनात्मक भागीदारी
कार्यक्रम की खासियत रही छात्राओं की सक्रियता। उन्होंने रंग-बिरंगे प्लेकार्ड बनाकर ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’, ‘गंदगी छोड़ो, सफाई जोड़ो’, ‘प्लास्टिक हटाओ, जीवन बचाओ’ जैसे नारे लिखे। छात्राएं गलियों और आसपास के क्षेत्रों में रैली निकालकर लोगों को संदेश देती नजर आईं। इस दौरान उनकी उत्सुकता साफ झलक रही थी कि यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की सीख है।
मुख्य अतिथि का संदेश
मुख्य अतिथि श्री संजीव सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा—
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के 'स्वच्छ रहें, स्वस्थ रहें' के आह्वान को सार्थक करने में स्कूलों की भूमिका बेहद अहम है। जब बच्चे सीखते हैं, तो पूरा परिवार सीखता है। स्वच्छता की यह चिंगारी धीरे-धीरे समाज और देश को रोशन करेगी।”
उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि एमसीडी द्वारा पहले से चलाए जा रहे ‘स्वच्छ दिल्ली अभियान’ को स्थानीय स्तर पर जनता का सहयोग तभी मिलेगा, जब स्कूल और संस्थान आगे बढ़कर नेतृत्व करेंगे।
स्कूल प्रशासन की सोच
प्रिंसिपल मनीषा जोशी ने कार्यक्रम के दौरान साफ कहा कि स्वच्छता केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी साझा किया कि स्कूल में प्लास्टिक और पेपर को रीसायकल कर दोबारा उपयोग किया जाता है। इसके जरिए छात्रों को यह समझाया जाता है कि कचरे को सही तरीके से प्रबंधित कर पर्यावरण को बचाया जा सकता है।
क्षेत्रीय सहयोग और भागीदारी
इस अभियान में कई स्थानीय चेहरे भी मौजूद रहे।
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सेक्रेटरी पीयूष चौधरी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों को न केवल पढ़ाई में बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में भी सक्षम बनाती हैं।
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सतीश भट्ट, एमसीडी कर्मचारी और पुलिस प्रशासन की टीम भी इस दौरान बच्चों के साथ सफाई करते दिखाई दिए।
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स्थानीय निवासियों ने भी बच्चों के उत्साह को देखकर कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक कम इस्तेमाल करने का वादा किया।
लोकल एंगल : मयूर विहार की बदलती तस्वीर
पूर्वी दिल्ली का मयूर विहार क्षेत्र घनी आबादी वाला इलाका है। यहां पर बाजार, कॉलोनियां और स्कूलों की संख्या अधिक है। इस कारण स्वच्छता एक चुनौती बनी रहती है। निगम द्वारा नियमित सफाई व्यवस्था होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर लोगों का सहयोग न मिलने से अक्सर सड़कों और पार्कों में गंदगी दिखाई देती है।
इस संदर्भ में मदर मैरी स्कूल की यह पहल खास महत्व रखती है। यह केवल छात्रों के लिए शैक्षणिक गतिविधि नहीं रही, बल्कि आसपास के निवासियों को भी एक आईना दिखाने जैसा था।
मेरा एनालिसिस
एक पत्रकार और स्थानीय दृष्टि से देखने पर यह साफ झलकता है कि—
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स्कूलों की भूमिका सबसे अहम है। बच्चे जब सीखते हैं तो परिवार और मोहल्ले भी प्रभावित होते हैं।
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इस तरह के अभियानों से केवल सफाई नहीं होती, बल्कि सोच में बदलाव आता है।
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निगम और प्रशासन की पहल तब तक सफल नहीं हो सकती, जब तक जनता सक्रिय भागीदारी न करे।
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इस अभियान ने यह साबित किया कि दिल्ली जैसे महानगर में, जहां प्रदूषण और गंदगी बड़ी समस्याएं हैं, वहां छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़ा असर डाल सकती हैं।
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यदि हर वार्ड में साल में दो-तीन बार ऐसे अभियान चलाए जाएं, तो दिल्ली को स्वच्छ और सुंदर राजधानी बनाने में कोई बाधा नहीं रहेगी।
स्वच्छता से जुड़े प्रमुख संदेश
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स्वच्छता अपनाना ही स्वस्थ जीवन का आधार है।
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गंदगी से बीमारियां फैलती हैं, सफाई से जीवन में खुशहाली आती है।
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प्लास्टिक का कम उपयोग ही पर्यावरण संरक्षण का रास्ता है।
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बच्चे सबसे अच्छे ब्रांड एंबेसडर हैं, क्योंकि वे जो सीखते हैं, वही परिवार तक पहुंचाते हैं।
निष्कर्ष
मदर मैरी स्कूल, मयूर विहार में आयोजित यह स्वच्छता अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक ऐसी सोच का प्रतीक है जो आने वाले समय में समाज को बदल सकती है। छात्राओं की भागीदारी, शिक्षकों और प्रशासन का सहयोग तथा स्थानीय लोगों की उपस्थिति ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि—
👉 “स्वच्छता न सरकार का अकेला अभियान है और न ही किसी संस्था की जिम्मेदारी, यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे तो न केवल मयूर विहार, बल्कि पूरा पूर्वी दिल्ली क्षेत्र एक स्वच्छ, स्वस्थ और प्रेरणादायी मॉडल बन सकता है।