कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, डॉक्टर दंपति समेत कई गिरफ्तार

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कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, डॉक्टर दंपति समेत कई गिरफ्तार

दैनिक पड़ताल संवाददाता | कानपुर | 1 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में कई डॉक्टरों, अस्पताल संचालकों और कथित बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार कई जिलों और संभवतः अन्य राज्यों तक फैले हो सकते हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला एक युवक, जो एमबीए अंतिम वर्ष का छात्र बताया जा रहा है, शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचा। युवक ने आरोप लगाया कि आर्थिक तंगी और फीस भरने की मजबूरी का फायदा उठाकर उससे किडनी ट्रांसप्लांट कराया गया, लेकिन तय रकम पूरी नहीं दी गई।

मिली जानकारी के अनुसार युवक को दस लाख रुपये देने का लालच दिया गया था। हालांकि ऑपरेशन के बाद उसे पूरी राशि नहीं मिली। इसी विवाद के बाद जब उसकी तबीयत बिगड़ी और पैसों को लेकर बात आगे बढ़ी, तो मामला पुलिस तक पहुंचा। यहीं से इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।

जांच में सामने आया है कि यह रैकेट बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को अलग-अलग अस्पतालों में बांट दिया जाता था ताकि किसी एक अस्पताल के पास पूरी जानकारी न रहे। एक अस्पताल में ऑपरेशन किया जाता, दूसरे में डोनर को रिकवरी के लिए रखा जाता और तीसरे अस्पताल में मरीज को भर्ती किया जाता था। इस व्यवस्था की वजह से रिकॉर्ड अलग-अलग जगहों पर बंटा रहता था और जांच एजेंसियों को पूरी तस्वीर एक साथ नहीं मिल पाती थी।

सूत्रों का कहना है कि कागजों में डोनर को मरीज का करीबी रिश्तेदार दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। यही इस पूरे नेटवर्क की सबसे बड़ी कड़ी मानी जा रही है।

क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने देर रात शहर के कई निजी अस्पतालों पर एक साथ छापेमारी की। जिन अस्पतालों के नाम सामने आए हैं, उनमें कल्याणपुर स्थित मेड लाइफ हॉस्पिटल, रावतपुर का अहुजा हॉस्पिटल और पंकी रोड स्थित प्रिया हॉस्पिटल शामिल हैं। टीम ने अस्पतालों से मेडिकल रिकॉर्ड, सर्जरी से जुड़े दस्तावेज और कई महत्वपूर्ण फाइलें कब्जे में ली हैं।

इस मामले में अब तक सात लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है। इनमें एक डॉक्टर दंपति और अन्य चिकित्सक शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल उर्फ काना को भी हिरासत में लिया है, जो खुद को डॉक्टर बताकर लोगों से संपर्क करता था और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को पैसे का लालच देकर इस नेटवर्क में फंसाता था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी कई आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जांच टीम को शक है कि इस नेटवर्क में बाहर से आने वाली मेडिकल टीमें और कुछ तकनीकी स्टाफ भी शामिल हो सकते हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शुरुआती जांच में इस रैकेट द्वारा कई अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने लोगों को इस नेटवर्क ने अपना शिकार बनाया।

यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग के शोषण की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। आर्थिक तंगी, पढ़ाई का दबाव और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे युवाओं को निशाना बनाकर इस तरह का अवैध कारोबार चलाया जाना बेहद चिंताजनक है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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