Noida News: उत्तराखंड पब्लिक स्कूल मान्यता विवाद—फीस, रिजल्ट और भविष्य को लेकर अभिभावकों का बड़ा प्रदर्शन, लिखित आश्वासन के बाद फिलहाल राहत

उत्तराखंड पब्लिक स्कूल मान्यता विवाद—फीस, रिजल्ट और भविष्य को लेकर अभिभावकों का बड़ा प्रदर्शन, लिखित आश्वासन के बाद फिलहाल राहत

नोएडा | 28 मार्च 2026

नोएडा के सेक्टर-56 स्थित उत्तराखंड पब्लिक स्कूल में CBSE मान्यता को लेकर चल रहा विवाद अब अभिभावकों की चिंता और आक्रोश के रूप में सामने आने लगा है। शनिवार को स्कूल परिसर में बड़ी संख्या में अभिभावक इकट्ठा हुए, जहां फीस, रिजल्ट और मान्यता को लेकर दिनभर हलचल बनी रही। पुलिस की मौजूदगी में बातचीत और लिखित आश्वासन के बाद फिलहाल स्थिति शांत हो गई है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।


विवाद की शुरुआत: CBSE कार्रवाई के बाद बढ़ी चिंता

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब CBSE की ओर से स्कूल की मान्यता को लेकर कार्रवाई की गई। बताया गया कि कुछ मानकों के अनुपालन को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिसके चलते स्कूल की मान्यता पर असर पड़ा। इस खबर के सामने आते ही अभिभावकों में चिंता का माहौल बन गया। विशेष रूप से कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे। कई अभिभावकों को आशंका थी कि यदि मान्यता रद्द रहती है तो बच्चों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है। इसी कारण कुछ अभिभावकों ने वैकल्पिक स्कूलों में दाखिले की संभावनाएं भी तलाशनी शुरू कर दीं।


फीस और रिजल्ट को लेकर नया विवाद

शनिवार को स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को संदेश भेजा गया कि जिन छात्रों की फीस जमा है, केवल उन्हीं का रिजल्ट जारी किया जाएगा। जिन अभिभावकों पर बकाया था, उन्हें पहले शुल्क जमा करने के लिए कहा गया। इस फैसले के बाद कई अभिभावकों ने जल्दबाजी में लेट फीस के साथ बकाया राशि जमा की और अपने बच्चों का रिजल्ट प्राप्त किया। हालांकि, इस प्रक्रिया ने अभिभावकों के बीच असंतोष को और बढ़ा दिया, क्योंकि कई लोगों का मानना था कि पहले मान्यता की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए थी।

350 से अधिक अभिभावकों का जमावड़ा

रिजल्ट वितरण के बाद करीब साढ़े तीन सौ अभिभावक स्कूल परिसर में इकट्ठा हो गए। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से सीधे बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। प्रबंधन की ओर से सीधे संवाद न होने के कारण अभिभावकों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता गया। कई अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।


पुलिस बुलानी पड़ी, तब शुरू हुई बातचीत

स्थिति को देखते हुए अभिभावकों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद ही बातचीत का रास्ता खुल सका। पुलिस की मौजूदगी में स्कूल प्रबंधन को अभिभावकों के सामने आकर बातचीत करनी पड़ी। इसके बाद अभिभावकों और प्रबंधन के बीच विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें सभी प्रमुख मुद्दों पर सवाल-जवाब किए गए।


मान्यता पर उठे अहम सवाल

अभिभावकों के सबसे बड़े सवाल CBSE मान्यता को लेकर रहे। उन्होंने पूछा:

  • क्या स्कूल की मान्यता पूरी तरह बहाल हो गई है?
  • यदि हां, तो उसका आधिकारिक प्रमाण क्या है?
  • यदि नहीं, तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित किया जाएगा?

इसके जवाब में स्कूल प्रबंधन ने कहा कि CBSE से बातचीत हो चुकी है और पहले लगाए गए सभी आपत्तियों को दूर कर दिया गया है। उनका दावा था कि अपील स्वीकार कर ली गई है और अब केवल आधिकारिक पत्र आना बाकी है, जो एक-दो दिनों में प्राप्त हो सकता है।


लिखित आश्वासन की मांग बनी निर्णायक


अभिभावकों ने मौखिक जवाबों पर भरोसा करने से इनकार कर दिया और लिखित में स्पष्ट आश्वासन देने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि यदि भविष्य में मान्यता बहाल नहीं होती है, तो क्या स्कूल छात्रों के अन्य स्कूलों में दाखिले और उससे जुड़े खर्च की जिम्मेदारी लेगा। यह मांग पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। बढ़ते दबाव के बीच, पुलिस की मौजूदगी में स्कूल प्रबंधन ने लिखित आश्वासन जारी किया।

क्या कहा गया लिखित नोटिस में

स्कूल द्वारा जारी पब्लिक नोटिस में बताया गया कि:

  • 18 फरवरी 2026 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी
  • 16 मार्च 2026 को अपील स्वीकार कर ली गई है
  • पहले लगाए गए कुछ निर्देश अब प्रभावी नहीं हैं
  • स्कूल का संचालन सामान्य रूप से जारी रहेगा
  • CBSE का आधिकारिक लिखित आदेश प्राप्त होते ही उसे नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा

हालांकि, नोटिस के साथ CBSE का आधिकारिक आदेश संलग्न नहीं किया गया, जिससे कुछ अभिभावकों की शंकाएं बनी रहीं।


स्थिति फिलहाल शांत, लेकिन चिंता बरकरार

लिखित आश्वासन मिलने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो गई और अभिभावक अपने-अपने घर लौट गए। हालांकि, यह शांति अस्थायी मानी जा रही है, क्योंकि अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है। अभिभावकों का कहना है कि जब तक CBSE की ओर से स्पष्ट और आधिकारिक आदेश नहीं आता, तब तक उनके मन में अनिश्चितता बनी रहेगी।


आगे क्या?

अब सभी की नजर आने वाले एक-दो दिनों पर टिकी है। यदि CBSE की ओर से सकारात्मक आदेश आता है, तो स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि मामला लंबा खिंचता है या निर्णय विपरीत आता है, तो अभिभावकों की चिंता फिर से बढ़ सकती है। पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि शिक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और समय पर जानकारी कितनी महत्वपूर्ण है। इस विवाद ने न केवल स्कूल प्रबंधन बल्कि शिक्षा प्रणाली के प्रति भी कई सवाल खड़े किए हैं।फिलहाल, लिखित आश्वासन के बाद स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन असली समाधान CBSE के अंतिम निर्णय के बाद ही सामने आएगा।

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