नोएडा में सफाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल! 157 कूड़ा गाड़ियां गायब, शहर में बढ़ी गंदगी

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नोएडा में सफाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल! 157 कूड़ा गाड़ियां गायब, शहर में बढ़ी गंदगी


नोएडा | दैनिक पड़ताल 

देश के सबसे आधुनिक और हाईटेक शहरों में गिने जाने वाले नोएडा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने शहर की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्मार्ट सिटी के दावों के बीच सफाई व्यवस्था में बड़ी लापरवाही सामने आने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। हाल ही में हुई जांच में पता चला कि शहर में कूड़ा उठाने के लिए तैनात कई गाड़ियां अपने तय रूट पर पहुंचीं ही नहीं, जिसके कारण कई इलाकों में कूड़े के ढेर लग गए। जानकारी के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण ने सफाई व्यवस्था संभाल रही कंपनी AG Enviro पर 10.38 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि 25 मार्च से 31 मार्च के बीच करीब 157 कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां और ई-रिक्शा अपने निर्धारित मार्ग पर नहीं चले। इस वजह से शहर के हजारों घरों से समय पर कूड़ा नहीं उठ सका।

लाखों लोगों को हुई परेशानी

सफाई व्यवस्था में आई इस बड़ी चूक का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर करीब 1.29 लाख घरों से कूड़ा नहीं उठाया गया। जब घरों के बाहर कूड़ा जमा होने लगा, तो कई लोगों ने मजबूरी में खाली प्लॉट, सड़क किनारे और ग्रीन बेल्ट में कचरा फेंकना शुरू कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि कई सेक्टरों और मुख्य सड़कों पर गंदगी के ढेर नजर आने लगे। इससे न सिर्फ शहर की खूबसूरती प्रभावित हुई, बल्कि बदबू और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया।

GPS जांच में खुली पोल

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन गाड़ियों में GPS सिस्टम लगा हुआ था। प्राधिकरण की मॉनिटरिंग टीम ने GPS डेटा की जांच की, जिसमें साफ पता चला कि कई गाड़ियां या तो कंपनी के यार्ड में खड़ी रहीं या फिर उन्हें रूट पर भेजा ही नहीं गया। यानी कागजों में गाड़ियां चल रही थीं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और थी। इसी वजह से इसे लोग सफाई व्यवस्था में बड़ा घोटाला मान रहे हैं।

कंपनी पर सख्त कार्रवाई

जांच के बाद नोएडा प्राधिकरण ने कंपनी पर 10.38 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। अधिकारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा सामने आई, तो कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। अब रोजाना GPS रिपोर्ट की निगरानी और फील्ड निरीक्षण को और मजबूत किया जाएगा।

शहर की छवि पर असर

नोएडा को एक आधुनिक और साफ-सुथरे शहर के रूप में देखा जाता है। यहां हर साल स्वच्छता और सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में इस तरह की लापरवाही कई सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर निगरानी होती, तो यह स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। कई स्थानीय निवासियों ने सोशल मीडिया पर भी गंदगी की तस्वीरें और वीडियो साझा कर प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की।

आम जनता क्या चाहती है?

लोगों की सबसे बड़ी मांग यही है कि सिर्फ जुर्माना लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यह भी जरूरी है कि शहर के हर सेक्टर में सफाई व्यवस्था की नियमित जांच हो। कई लोगों का मानना है कि अगर तकनीक का सही इस्तेमाल हो, तो ऐसी समस्याओं को रोका जा सकता है। GPS ट्रैकिंग, CCTV मॉनिटरिंग और नागरिक शिकायत पोर्टल को और मजबूत बनाने की जरूरत है। नोएडा जैसे बड़े शहर में सफाई व्यवस्था की ऐसी लापरवाही चिंताजनक है। यह मामला सिर्फ गंदगी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और जनता के भरोसे का भी है। उम्मीद की जा रही है कि इस कार्रवाई के बाद शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।

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