सुधार के दावों के बाद भी मामूरा में बिजली कटौती जारी, तय समय से पहले सप्लाई बंद होने पर सवाल
रिपोर्ट: कुलदीप चौहान, नोएडा ग्राम मामूरा में 17 सितंबर 2025 को बिजली विभाग ने बड़ी राहत की घोषणा की थी। सेक्टर-67 उपकेंद्र के फीडर नंबर-7 पर लंबे समय से चल रहा तकनीकी कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई। विभाग के अनुसार यहां 11 केवी फीडर बे फर्ज़िकेशन का काम किया गया, जिसके बाद उपभोक्ताओं को लगातार और स्थिर बिजली मिलने का दावा किया गया था। यह कार्य इसलिए जरूरी था क्योंकि फीडर नंबर-7 पर जरूरत से ज्यादा लोड होने के कारण मामूरा और आसपास के इलाकों में बार-बार ट्रिपिंग हो रही थी। ओवरलोडिंग की वजह से बिजली कटौती आम बात बन गई थी और इससे घरेलू जीवन के साथ-साथ छोटे व्यापार भी प्रभावित हो रहे थे।
कैसे किया गया समाधान?
बिजली विभाग ने तकनीकी सुधार योजना के तहत फीडर बे फर्ज़िकेशन लागू किया। इसके अंतर्गत लोड को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित किया गया, ताकि एक ही लाइन पर अत्यधिक दबाव न पड़े। अधिकारियों का कहना था कि इस कदम से ट्रिपिंग की समस्या खत्म होगी और बिजली आपूर्ति अधिक संतुलित एवं स्थिर बनेगी। इस कार्य की निगरानी अवर अभियंता (जेई) नव तेज सिंह ने की। विभागीय सूत्रों के अनुसार उन्होंने न केवल उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, बल्कि खुद भी ग्राउंड स्तर पर मौजूद रहकर कार्य की मॉनिटरिंग की। कई बार रात में भी काम कराया गया ताकि उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिल सके। स्थानीय ग्रामीणों ने उस समय जेई की सराहना की थी। एक ग्रामीण ने कहा था, “जेई साहब ने हमारी बात सुनी और समाधान कराया। अब लगता है समस्या खत्म हो जाएगी।”
लेकिन फिर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
तकनीकी सुधार और राहत की घोषणा के कुछ समय बाद ही फिर से बिजली कटौती को लेकर असंतोष सामने आने लगा है। हाल ही में 33 केवी ब्रेकर की टेस्टिंग और ओवरहॉलिंग के लिए शटडाउन घोषित किया गया था। विभाग की ओर से सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक तीन घंटे की कटौती की सूचना दी गई। लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ गलियों में सुबह 8 बजे ही बिजली काट दी गई। यानी घोषित समय से लगभग तीन घंटे पहले सप्लाई बंद कर दी गई। इससे लोगों की नाराजगी बढ़ गई है।
जमीनी स्थिति क्या कहती है?
ग्रामीणों का कहना है कि:
- कई बार बिना पूर्व सूचना बिजली बाधित हो जाती है
- घोषित समय से पहले कटौती कर दी जाती है
- बहाली तय समय से अधिक देर में होती है
- स्पष्ट अपडेट नहीं दिए जाते
रविवार जैसे अवकाश के दिन भी लंबी कटौती से लोग परेशान हैं। सुबह के समय अचानक बिजली जाने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू काम और छोटे कारोबार प्रभावित हुए। कई घरों में पानी की मोटर न चल पाने से जल आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
एसओपी पालन की मांग
उपभोक्ताओं का कहना है कि तकनीकी कार्य जरूरी हो सकता है, लेकिन शटडाउन की तय प्रक्रिया (एसओपी) का पालन अनिवार्य होना चाहिए। अगर किसी कारणवश समय से पहले सप्लाई बंद करनी पड़े, तो इसकी स्पष्ट और समय पर सूचना दी जानी चाहिए। लोगों का सवाल है कि जब ओवरलोडिंग की समस्या दूर करने के लिए फीडर बे फर्ज़िकेशन किया जा चुका है, तो रोजाना की कटौती का कारण क्या है? क्या नई तकनीकी चुनौती सामने आई है या मेंटेनेंस कार्य अपेक्षा से अधिक जटिल है?
भरोसे की स्थिति
ग्राम मामूरा के लोगों ने तकनीकी सुधार के दौरान धैर्य और सहयोग दिखाया था। कई बार मरम्मत कार्य के कारण लंबी कटौती सहन की, इस उम्मीद में कि भविष्य में स्थिर बिजली मिलेगी।
अब उपभोक्ताओं की मांग है कि:
- घोषित शटडाउन समय का सख्ती से पालन किया जाए
- समय से पहले सप्लाई बंद न की जाए
- बहाली का स्पष्ट समय बताया जाए
- तकनीकी कारणों की पारदर्शी जानकारी दी जाए
आगे क्या?
बिजली विभाग द्वारा किए गए सुधार कार्य का उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देना था। लेकिन वर्तमान शिकायतें इस बात का संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी सुधार की गुंजाइश है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग इन शिकायतों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या भविष्य में शटडाउन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा। ग्राम मामूरा के लोगों की उम्मीद है कि सुधार के दावे वास्तविक राहत में बदलेंगे और अनिश्चित बिजली कटौती से उन्हें स्थायी मुक्ति मिलेगी।