नोएडा व्यापारी संवाद में उठे ई-वे बिल और VLTD डिवाइस के मुद्दे, व्यापारियों ने मांगा समाधान
नोएडा व्यापारी संवाद में व्यापारियों ने उठाए प्रमुख मुद्दे, ई-वे बिल नियम और VLTD डिवाइस उपलब्धता पर मांगा समाधान
व्यापारियों ने कहा— नए नियमों के साथ जागरूकता और व्यावहारिक व्यवस्था भी जरूरी
नोएडा में राज्य कर विभाग द्वारा आयोजित व्यापारी संवाद कार्यक्रम व्यापार कर भवन, नोएडा के सभागार में एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 (अपील) राकेश वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त राज्य कर गौतमबुद्ध नगर के.के. राय सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य व्यापारियों और विभाग के बीच संवाद स्थापित कर व्यापार एवं कराधान से जुड़ी समस्याओं और सुझावों पर चर्चा करना था।
व्यापारियों ने रखीं अपनी प्रमुख चिंताएं
बैठक में विभिन्न व्यापारिक संगठनों और व्यापारियों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के सामने रखे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, नोएडा इकाई के वरिष्ठ महामंत्री मनोज भाटी ने व्यापार और परिवहन क्षेत्र से जुड़े कई विषयों को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने विशेष रूप से 15 जून 2026 से लागू होने वाले ई-वे बिल संबंधी नए प्रावधानों को लेकर व्यापारियों की चिंताओं को अधिकारियों तक पहुंचाया।
मनोज भाटी ने कहा कि कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाना आवश्यक है, लेकिन इसका उद्देश्य ईमानदार व्यापारियों के लिए उत्पीड़न या अनावश्यक कठिनाई पैदा करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नए नियम लागू करने से पहले व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए और उनके व्यावहारिक प्रभावों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए, ताकि छोटे और मध्यम व्यापारियों को तकनीकी त्रुटियों के कारण परेशान न होना पड़े।
फर्जी बिलिंग और तकनीकी चुनौतियों पर भी चर्चा
बैठक के दौरान फर्जी बिलिंग, ई-वे बिल से जुड़ी तकनीकी समस्याएं, कर निर्धारण प्रक्रियाओं की जटिलताएं और व्यापारियों के सामने आने वाली अन्य व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
संगठन की ओर से विभाग से यह अपेक्षा की गई कि व्यापारियों के साथ सहयोगात्मक और समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए, जिससे कर अनुपालन को अधिक सरल और सुगम बनाया जा सके।
दूसरे ई-वे बिल की प्रक्रिया पर अधिकारियों ने दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान संगठन के उपाध्यक्ष ओमपाल शर्मा ने अधिकारियों से तकनीकी स्पष्टता मांगी कि यदि किसी वाहन के लिए पहले जारी ई-वे बिल की अवधि समाप्त होने से पहले दूसरा ई-वे बिल बनाना आवश्यक हो तो पहले जारी ई-वे बिल को बंद करने की प्रक्रिया क्या होगी।
इस पर संयुक्त आयुक्त राज्य कर के.के. राय ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में माल प्राप्तकर्ता (परचेजर) द्वारा पहले जारी ई-वे बिल को निरस्त किया जाना चाहिए। व्यापारियों ने इस जानकारी को उपयोगी और मार्गदर्शक बताया।
VLTD डिवाइस की उपलब्धता को लेकर भी उठी चिंता
इसी अवसर पर संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने नोएडा स्थित आरटीओ कार्यालय में परिवहन विभाग के आरआई संजय गुप्ता से मुलाकात कर व्यावसायिक वाहनों में अनिवार्य की गई व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) की उपलब्धता का मुद्दा उठाया।
मनोज भाटी ने कहा कि सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों में वीएलटीडी डिवाइस अनिवार्य किए जाने के बावजूद अधिकृत कंपनियों के माध्यम से पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि इसके कारण बड़ी संख्या में वाहन मालिकों को परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीनीकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई वाहन केवल डिवाइस उपलब्ध न होने के कारण लंबे समय से खड़े हैं, जिससे परिवहन कारोबार प्रभावित हो रहा है और वाहन स्वामियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि जब तक अधिकृत एजेंसियों द्वारा पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में इस बाध्यता से अस्थायी राहत देने पर विचार किया जाए।
अंत में व्यापारियों ने जताई उम्मीद
बैठक के अंत में व्यापारियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि राज्य कर विभाग और परिवहन विभाग इन व्यावहारिक समस्याओं पर सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।
इस अवसर पर नरेश कुच्छल (चेयरमैन), राम अवतार सिंह (अध्यक्ष), मनोज भाटी, दिनेश महावर, ओमपाल शर्मा, धीरज चौधरी और मनोज गोयल (दादरी) सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
• यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।
• इसमें व्यक्त मांगें संबंधित व्यापारिक प्रतिनिधियों के दावे और सुझाव हैं।
• ई-वे बिल नियमों और परिवहन संबंधी प्रावधानों के अंतिम अनुपालन हेतु संबंधित विभागों की आधिकारिक अधिसूचनाएं देखी जानी चाहिए।